ध्वनि तथा इसके महत्व कि चर्चा करें?

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Date -17 Aug 2020


ध्वनि तथा इसके महत्व



ध्वनि एक प्रकार कि ऊर्जा है, जो हमे सुनने को अनुभूति प्रदान करती है। इसकी प्रकृति Longitudinal wave होती है। यह माध्यम के समांतर संपीडन एवम विरलन के फलस्वरूप गमन करते है।संपीडन वाले स्थान पर माध्यम का दाब एवम कणों का घनत्व अधिक होता है, तथा विरलन वाले स्थान पर माध्यम का दाब एवम घनत्व कम होता है। जब एक longitudinal wave किसी माध्यम से होकर गुजरती है, तो उस माध्यम का घनत्व बढ़ता या घटता अर्थात बदलता रहता है।


ध्वनि तरंगों को गमन करने लिए माध्यम अनिवार्य है। बिना माध्यम के ध्वनि तरंगें गमन नहीं कर सकती है, अत: निर्वात में इनका चाल शून्य होता है।


अब हम ध्वनि तरंगों के विशेषताओं के बारे में पढ़ेंगे, तो चलिए शुरू करते है। प्रिय पाठको, आप लोगो से अनुरोध है, अधूरा पढ़ कर ना जाए, इसके आगे आपको मै बहुत अच्छी अच्छी जानकारी बताने वाला हूं, जो जानकारी आपको, भविष्य के परीक्षाओं में तो काम आएंगे ही, साथ साथ व्यवहारिक जीवन में भी उपयोगी साबित होंगे।

Characteristics of Sound Waves


1. तीव्रता (Intensity)


यह ध्वनि का वह अभिलक्षण है, जिसके द्वारा कोई भी ध्वनि धीमी अथवा तेज सुनाई देती है। जिस ध्वनि की तीव्रता कम होती है, वह धीमी सुनाई पड़ती है, तथा जिस ध्वनिं कि तीव्रता अधिक होती है, वह तेज सुनाई पड़ती है। ध्वनि की तीव्रता को डेसीबल (dB) में मापा जाता है। यह हमारे कानों कि सुग्रहिता पर निर्भर करता है।

2. तारत्व (Pitch or Sharpness). 

ध्वनि का तारत्व उसकी आवृति पर निर्भर करता है। जैसे जैसे ध्वनि स्रोत की आवृति बढ़ती जाती है, वैसे वैसे उत्पन्न ध्वनि का तारत्व बढ़ता जाता है तथा ध्वनि पतली अथवा तीक्ष्ण होती जाती है। इसके विपरित जैसे जैसे ध्वनि स्रोत की आवृति घटती जाती है, वैसे वैसे उत्पन्न ध्वनि का तारत्व कम होता जाता है, तथा ध्वनि मोटी होती जाती है। ध्वनि की इस अभिलक्षण के कारण कोई भी ध्वनि हमे मोटी अथवा पतली मेहसूस होती है, जैसे पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को आवाज पतली होती है, इसका तात्पर्य यह है, कि पुरुषों को अपेक्षा महिलाओं के आवाज की तारत्व अधिक होती है, अर्थात महिलाओं कि ध्वनि की आवृति अधिक होती है। शेर कि दहाड़, कि अपेक्षा मच्छर की भिनभिनाहट का अधिक पतला होता है, क्यूंकि शेर की दहाड़ की तुलना में मच्छर की भिनभिनाहट का तारत्व अधिक होता है, अर्थात शेर द्वारा उत्पन्न आवाज की तुलना में मच्छर द्वारा उत्पन्न आवाज की आवृति अधिक होती है।

3. गुणता (Quality). 

जब दो ध्वनियों की तीव्रता तथा तारत्व समान हो जाती है, तो उस स्थिति में, ध्वनि के तीसरे लक्षण  का प्रयोग करके विभिन्नता प्रकट कि जाती है। यह गुण ध्वनि में उत्पन्न अधिस्वर की वजह से व्यक्त होता है। अधिस्वर के वजह से ही सभी स्रोतों से उत्पन्न ध्वनि अलग अलग गुणता की होती है अर्थात दूर कहीं वायलिन बज रही हो, तो हम यहीं से बता देते है, कि कौन सा वाद्ययंत्र बज रहा है। आपके परिवार का कोई सदस्य यदि आपको पुकारता है, तो आपको समझ में आ जाता है, कि मां है, या पापा या फिर कोई और। यह सब कुछ गुणता व्यक्त करता है।

जब किसी ध्वनि स्रोत से ध्वनि की उत्पति होती है, तो उत्पन्न ध्वनि को स्वर कहते है, पर इस संसार में मौजूद हर चीज में अशुद्धता पाई जाती है, जिसके कारण स्वर के साथ साथ कुछ अधिस्वर भी अशुद्धि के रूप में उत्पन्न हो जाते है, फलत: यहीं अशुद्धता अलग अलग आवाज होने के कारण होते है, क्यूंकि सभी ध्वनि स्रोतों से उत्पन्न स्वर की गुणता एक समान होती है, पर उत्पन्न आधिस्वर अलग अलग होता है 

Effects of physical parameters on speed of sound

1. दाब का प्रभाव( effect of pressure). 


ध्वनि की चाल पर, दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

2. ताप का प्रभाव(effect of temperature). 

गैसों में ध्वनि की चाल, गैस के परमताप के वर्गमूल के समानुपाती होता है। अत: माध्यम का ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ जाती है। वायु में 1 डिग्री सेल्सियस ताप बढ़ने पर ध्वनि की चाल 0.61 m/s बढ़ जाती है।
                          V ∝ √T

3. आर्द्रता का प्रभाव(effect of Humidity). 

वायु में आर्द्रता बढ़ने पर, ध्वनिं की चाल बढ़ जाती है। यहीं कारण है, कि बरसात के मौसम में सिटी की  आवाज बहुत दूर तक सुनाई पड़ती है।

4. वायु की दिशा (Direction of wind). 

यदि ध्वनि का संचरण वायु प्रवाह की दिशा में होती है, तो ध्वनि की चाल बढ़ जाती है, परंतु यदि ध्वनि का संचरण, वायु प्रवाह के विपरीत दिश में होती है, ती ध्वनि की चाल घट जाती है।

5. आवृति अथवा wave length का प्रभाव. गैसों में ध्वनि की चाल पर आवृति अथवा wave Length का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

6. एक विशेष माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के जड़त्वीय गुण तथा प्रयास्थ ता पर निर्भर करती है।

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल

वायु - 332 M/Sec

हाइड्रोजन - 1269 M/Sec

कार्बन डाई आक्साइड - 260 M/Sec

जलवाष्प 100 डिग्री सेल्सियस पर - 405 M/Sec

एल्कोहल - 1213 M/Sec

पानी - 1483 M/Sec

समुद्री जल - 1533 M/Sec

पारा - 1450 M/Sec

कांच - 5640 M/Sec

एल्यूमिनियम - 6420 M/Sec

लोहा - 5130 M/Sec

Sonic Boom

जब कोई पिंड ध्वनि की चाल से अधिक चाल पर गति करता है, तब उसे पराध्वनिक चाल से चलता हुआ कहा जाता है। गोलियां वायुयान, रॉकेट आदि प्राय: पराध्वनिक चाल से चलते है। जब ध्वनि उत्पादक स्रोत ध्वनि की चाल से अधिक तेजी से गति करता है, तो ये वायु में प्रघाती तरंगें उत्पन्न करते है, इन प्रघाती तरंगों में बहुत ऊर्जा होती है। इस प्रकार प्रघाती तरंगों से सम्बद्ध वायु दाब में परिवर्तन से एक बहुत तेज एवम प्रबल ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे Sonic Boom कहते है। पराध्वनिक वायुयान से उत्पन्न इस ध्वनि बूम में इतनी मात्रा में ऊर्जा होती है, कि ये खिड़कियों के शीशों को तोड़ सकती है और यहां तक कि भवनों को भी क्षति पहुचां सकती है तथा इनके द्वारा उत्पन्न शोर से हमारे कानों को बहुत तेज दर्द होता है

Hearing Aid. 


जिन लोगो को कम सुनाई देता है, उन्हें इस यंत्र कि आश्यकता होती है। यह Battery से चलने वाली एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसमें एक छोटा सा माइक्रोफोन, एक Amplifier, तथा एक स्पीकर होता है। जब ध्वनि Microphone पर पड़ती है, तो वह ध्वनि तरंगों को विद्युत् संकेतो में परिवर्तित कर देता है, Amplifier इन विद्युत् संकेतो को प्रवर्धित कर देता है। यह संकेत स्पीकर द्वारा ध्वनि तरंगों में बदल दिए जाते है, जिससे यह Sound Waves कान के डायफ्राम पर आपतित होती है, तथा व्यक्ति को ध्वनि साफ सुनाई देती है।

* समुन्द्र में स्थान स्थान पर ऊंचे लाइट हाउस बने जाते है। जहां से बड़े बड़े सायरन बजाकर जहाजों को संकेत भेजे जाते है। कभी कभी जहाज ऐसे क्षेत्र में आ जाते है, जहां उसे सायरन की ध्वनि सुनाई नहीं देती। ऐसे क्षेत्र को नीरव क्षेत्र कहते है। ऐसे क्षेत्रों में जहाज पर सायरन आने वाली Direct Sound एवम अपनी परावर्तित होकर आने वाली ध्वनि के बीच Destructive Interference होता है। जिससे ध्वनि की तीव्रता अत्यंत कम हो जाती है। 

Uses of Ultrasonic Waves by Bats.

चमगादड़ गहन अंधकार में अपने भोजन को खोजने के लिए उड़ते समय पराध्वनि उत्सर्जित करता है, तथा परावर्तन के पश्चात इन तरंगों का संसुचन करता है। चमगादड़ द्वारा उत्पन्न high pitch के पराध्वनी स्पंद, अवरोधों अथवा किटो से प्रवर्तित होकर चमगादड़ के कानों तक पहुंचते है। इन परावर्तित पुन: स्पंदो कि प्रकृति से चमगादड़ को पता चलता है, कि अवरोध अथवा किट कि दूरी एवम स्थिति कहा है, और यह बड़ा या छोटा है, किस प्रकार का है। इस प्रकार चमगादड़ आसानी से अपना शिकार कर लेता है।

सोनार (SONAR).

यह एक संसुचक होता है, Ultrasonic Waves पर कार्य करता है। इसकी कार्यपद्धति बिल्कुल चमगादड़ के समान ही है। इसके द्वारा पनडुब्बियों को समुन्द्र में पिंड, मछलियों के समूह, शत्रुओं को पनडुब्बी, रास्ते का चट्टान आदि का पता लगाया जाता है। इसका पूरा नाम Sound Navigation and Ranging है। यह एक ऐसी युक्ति है, जिसके द्वारा ultrasonic waves उत्पन्न कि जाती है ये रास्ते में किसी अवरोध से टकराता है, और पुन: परिवर्तित होकर सोनार पर आपतित होती है, जिसके फलस्वरूप अवरोध की दूरी अथवा उसकी प्रकृति का पता चल जाता है।

Ultrasonic waves का प्रयोग सोनार में निम्नलिखित कारणों से होता है


1. Ultrasonic waves कि आवृति अधिक और wave length बहुत कम होता है। इसी कारण इसका प्रयोग समुद्र कि गहराई ज्ञात करने तथा आने वाले अवरोधों का पता लगाने में किया जाता है।

2. Ultrasonic waves को मनुष्य के द्वारा नहीं सुना जा सकता है।

Doppler's Effect.


इसके अनुसार, "जब किसी श्रोता एवम ध्वनि स्रोत के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो इस दौरान ध्वनि की आवृति में आभासी परिवर्तन होता है।" अर्थात आवृति परिवर्तित नहीं होती है पर श्रोता को ऐसा लगता है, कि आवृति में परिवर्तन हो रहा है। जैसे - रेलवे स्टेशन पर खड़े किसी व्यक्ति को आ रही ट्रेन की सायरन बहुत तेज एवम तीक्ष्ण सुनाई पड़ती है, और जैसे ही ट्रेन उससे गुजर कर आगे बढ़ जाती है, तो सायरन कम तीक्ष्ण तथा धीमा सुनाई पड़ता है, पर उसकी आवृति वहीं रहती है, बस दूरी के बढ़ने से आभासी परिवर्तन मालूम पड़ता है। यह एक छद्म आभास होता है।

Doppler's Effect का मुख्य कारण श्रोता एवम ध्वनि स्रोत के बीच की आपेक्षिक गति है, और यह स्थितियों में संभव है --

1. जब ध्वनि स्रोत गतिमान तथा श्रोता विराम में हो।

2. जब श्रोता गतिमान तथा ध्वनि स्रोत विराम में हो।

3. जब ध्वनि स्रोत एवम श्रोता दोनों गति की अवस्था में हो।

Uses of Doppler's Effect


1. इसका प्रयोग वायु में उड़ते विमान के वेग का अनुमान लगाने में किया जाता है।

2. रडार में।

3. जल भीतर पंडूबियो के वेग का आकलन करने में ।

4. तारों तथा Galaxy कि गतिं का अनुमान लगाया जाता है।

5. Airports पर वायुयान की दिशा निर्देशित करने में ।

6. शरीर के विभिन्न भागों में रक्त के प्रवाह तथा हृदय की धड़कन का अध्ययन करने में।


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